प्यार का तरीका

बाबू तू सोयेगी नहीं I मेरे कानो में यह आवाज़ जाते ही मेरा मन लपका उस ऒर देखने को I मिनी बस की सबसे पीछे की सीट पर , कोने में खिड़की से चिपकी एक महिला I कपड़े कुछ मैले से , आँखों के नीचे गाढ़े काले रंग के धब्बे I हड्डियों के बीच चेहरा लापता सा अपने आप को ढूंढ रहा था I रंग के नाम पर सिर्फ भूरे रंग के निशान I सर्दी के कपड़ो में लिपटी वो , शाल से ढकी अनैमिक लग रही थी I उसका सर बार बार झुका जा रहा था I नींद के झोंके उसकी गर्दन को मनो मरोड़े जा रहे थे I उसका पति एवं दो बच्चे उसकी ऒर आस की नजर से देख रहे थे I पति उसके गालो पर थप्पड़ों की बरसात किये हुए था I इरादा उसे सोने नहीं देने का था I किसी फेमिनिस्ट ने नहीं देखा , भला हुआ , नहीं तो मामला कचेहरी तक पहोच जाता I कभी कभी प्यार कैसे किया जाये यह भी एक मसला हो जाता है I उसका पति उसको घुसा दिखा रहा था I अपनी पुरानी ज्यादतियों की याद दिलाते हुए उसको धमका रहा था I किसी भी हाल में उसे सोने न देना ही उसके पति का एक मात्र लक्षय था I इन सब में प्यार भरपूर था I कुछ लोग मैले कुचले कपड़े देख किनारा काट रहे थे I उसके बच्चे निश्चिंत हो आगे की सीट पर बैठ बiहर का नजारा देख रहे थे I मनो हॉस्पिटल जाना उनके लिए पिकनिक सामान था I महिलाएं पति को घृणा की दृष्टि से देख रही थी I प्यार करने के तरीके में एक पुरुषत्व था I पितृसत्ता की झलक से ओत प्रोत था वह दृश्य I कभी कभी सोचता हु , जरुरी क्या है , प्यार या उसका तरीका ?

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s